प्यारे पापा पर कविता - Poems on Father - पिता पर कविता

प्यारे पापा पर कविता – Poems on Father – पिता पर कविता

प्यारे पापा पर कविता – दोस्तो आज कि इस पोस्ट में हम आपके लिए लाये है Papa Par Kavita In Hindi, Fathers Poems in Hindi, पिता पर खूबसूरत कविता,  मेरे पापा पर कविता, पापा पर कविता हिंदी में, पिता के जन्मदिन पर कविता, कुछ शब्द पिता के नाम, पिता पर कविता कोश, पापा के लिए शायरी, पिताजी के लिए स्टेटस क्योकिं इस बड़ी सी दुनिया में पापा जी हमे अपने पैरो पर खड़े होने में हमारी मदद करते है। इस दुनिया में सबसे अनोखा रिस्ता बाप और बेटा/बेटियों का होता है, इसलिए हमारे देश के कुछ महान कवियों ने पिताजी पर कविताये लिखी है। जिनको आज हम इस पोस्ट में पढ़ेंगे तो चलिए शुरू करते है। 

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प्यारे पापा पर कविता

कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता,
कभी धरती तो कभी आसमान है पिता। 

जन्म दिया है अगर माँ ने,
जानेगा जिससे जग वो पहचान है पिता,
कभी कंधे पे बिठा के मेला दिखाता है पिता। 

कभी बनके घोड़ा घुमाता है पिता,
माँ अगर पैरों पर चलना सिखाती है,
पैरों पर खड़ा होना सिखाता है पिता।

Mere Papa Par Kavita In Hindi 

एक बचपन का ज़माना था,
जिस में खुशियों का खजाना था,
चाहत चाँद को पाने की थी,
पर दिल तितली का दीवाना था। खबर ना थी कुछ सुबहा की,
ना शाम का कोई ठिकाना था,
थक कर आना स्कूल से,
पर खेलने भी जाना था। 

माँ की कहानी थी,
परियों का फ़साना था,
बारिश में कागज की नाव थी। 

हर मौसम सुहाना था,
रोने की कोई वजह ना थी,
और मैं अपने “पापा” का दीवाना था।

Heart Touching Poem For Father 

मेरे प्यारे प्यारे पापा,
मेरे दिल में रहते पापा। मेरी छोटी सी ख़ुशी के लिए,
सब कुछ सेह जाते हैं पापा। 
 
पूरी करते हर मेरी इच्छा ,
उनके जैसा नहीं कोई अच्छा। 
 
मम्मी मेरी जब भी डांटे,
मुझे दुलारते मेरे पापा,
मेरे प्यारे प्यारे पापा !

Best Poem on Father in Hindi

हर घर में होता है वो इंसान
जिसे हम पापा कहते है।

सभी की खुशियों का ध्यान रखते,
हर किसी की इच्छा पूरी करते। 

खुद गरीब और बच्चों को अमीर,
बनाते जिसे हम पापा कहते है।

बड़ों की सेवा भाई-बहनों से लगाव,
पत्नी को प्यार, बच्चों को दुलार। 

खोलते सभी ख्वाहिशों के द्वार,
जिसे हम पापा कहते है।

बेटी की शादी, बेटों को मकान,
बहुओं की खुशियां, दामादो का मान। 

कुछ ऐसे ही सफर में गुजारे वो हर शाम
जिसे हम पापा कहते है।

पिता पर छोटी कविता

मैं पतंग, पापा है डोर, 
पढ़ा लिखा चढ़ाया आकाश की ओर,
खिली काली पकड़ आकाश की ओर। जागो, सुनो, कन्या भ्रूण हत्यारों,
पापा सूरज की किरण का शोर। 

मैं बनू इंदिरा सी, पापा मेरे नेहरू बने,
बेटियों के हत्यारों, अब तो पाप से तौबा करो,
पापा सच्चे, बेहद अच्छे, नेहरू इंदिरा से वतन भरे। 

बेटियां आगे बेटो से, पापा आओ पाक एलान करो,
देवियों के देश भारत की जग में, ऊंची शान करें !

पिता के जन्मदिन पर कविता

पापा हर फ़र्ज निभाते हैं,
जीवन भर कर्ज चुकाते हैं,
बच्चे की एक ख़ुशी के लिए,
अपने सुख भूल ही जाते हैं |फिर क्यों ऐसे पापा के लिए,
बच्चे कुछ कर ही नही पाते, 
ऐसे सच्चे पापा को क्यों,
पापा कहने में भी सकुचाते |

पापा का आशीष बनाता है,
बच्चे का जीवन सुखदाइ,
पर बच्चे भूल ही जाते हैं,
यह कैसी आँधी है आई |

जिससे सब कुछ पाया है,
जिसने सब कुछ सिखलाया है,
कोटि नमन ऐसे पापा को,
जो हर पल साथ निभाया है |

प्यारे पापा के प्यार भरे,
सीने से जो लग जाते हैं,
सच्च कहती हूँ विश्वास करो,
जीवन में सदा सुख पाते हैं |

पिता पर खूबसूरत कविता

आज भी वो प्यारी मुस्कान याद आती है,
जो मेरी शरारतों से मेरे पापा के चेहरे पर खिल जाती थी,
अपने कन्धों पर बैठा के वो मुझे दुनिया की सैर कराते थे। जहाँ भी जाते मेरे लिए ढेर सारे तोहफे लाते थे,
#Mere हर जन्मदिन पर वो मुझे साथ मंदिर ले जाते थे,
मेरे result का बखान पूरी दुनिया में कर जाते थे। 

मेरे जिंदगी के सारे सपने उनकी आँखों में पल रहे थे,
#Mere लिए खुशियों का आशियाना वो हर पल बन रहे थे,
मेरे सपने उनके साथ चले गये मेरे पापा मुझे छोड़ गये,
अब आँखों में शरारतें नहीं बस आँसू ही दीखते हैं।

कुछ शब्द पिता के नाम

बाबुल मोरे!
मैं धान की पौध
सींचा तुमने अपने पसीने से,
सजग रहने बचाया नन्ही,
कोंपलों को।

पानी में खड़े रहकर रोपा,
दूसरे खेत में,
देखा कि बहा न दे,
पानी का रेला,
नाजुक जड़ों को!

आज मजबूती से पैर जमाए,
लहलाती खेती-सी मैं!
लेकिन
भूली नहीं मैं
तुम्हारी पीठ पर बरसती
सर्दी, गर्मी, बरसात
तुम्हारे पैरों की गलन!

मेरा गर्व तुम्हारा ही गौरव है
बाबुल मोरे!

मेरे प्यारे पापा पर कविता 
आज तो पापा मंजिल भी है,
दम भी है परवाजों में
एक आवाज नहीं है लेकिन,
इतनी सब आवाजों में। सांझ की मेरी सैर में हम-तुम,
साथ में मिल कर गाते थे
कच्चे-पक्के अमरूदों को,
संग-संग मिल कर खाते थे। 

उन कदमों के निशान पापा,
अब भी बिखरे यहीं-कहीं
कार भी है, एसी भी है,
पर अब सैरों में मज़ा नहीं। 

कोई नहीं जो आंसू पोछें,
बोले पगली सब कर लेंगे
पापा बेटी मिलकर तो हम,
सारे रस्ते सर कर लेंगे। 

इतनी सारी उलझन है,
और पप्पा तुम भी पास नहीं,
ये बिटिया तो टूट चुकी है,
अब तो कोई आस नहीं। 

पर पप्पा ! तुम घबराना मत,
मैं फिर भी जीत के आउंगी
मेरे पास जो आपकी सीख है,
मैं उससे ही तर जाऊंगी। 

फिर से अपने आंगन में हम,
साथ में मिल कर गाएंगे
देखना अपने मौज भरे दिन,
फिर से लौट के आएंगे। 

पिता पर कविता कोश

दर्द को दबाना,
आंसू को छिपाना,
कोई सीख ले आपसे।

अंगारों की छांव सा आशियाना,
कांटो पर चलकर मुस्कुराना,
यह जमाना वह जमाना भी,
सीख ले आपसे।

पिता ही तो कल्पतरू,
पिता ही पारिजात,
तृष्णा तो बस बूंद चाहे,
फिर भी हो बरसात।

वाकई जिसके आगे,
सारी जन्नतें अधूरी हो जाती है,
बस पिता कहने भर से,
सारी मन्नते पूरी हो जाती है।

दोस्तों हम आशा करते है की आपको हमारी आज की ये प्यारे पापा पर कविता – Poems on Father – पिता पर कविता पोस्ट पसंद आयी होगी। अगर हाँ, तो इसको शेयर करना न भूले और साथ ही साथ नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी।

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